Today History

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आज का इतिहास - 4 फरवरी

हजारीबाग जिले की स्थापना 1833 ई. में हुई थी। वर्तमान में गिरिडीह, चतरा, कोडरमा, रामगढ़ जो जिले हैं, ये सभी पहले हजारीबाग जिले का हिस्सा थे। एक अक्टूबर 1886 ई. में सरकारी अधिसूचना द्वारा नगर पालिका की स्थापना हुई थी।

हजारीबाग जिले के खपरियावां गांव में स्थित ऐतिहासिक नरसिंह स्थान मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला का आयोजन किया जाता है, जिसे स्थानीय लोग केतारी मेला भी कहते हैं। यह मंदिर लगभग साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है और भगवान नरसिंह की प्राचीन प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।

4 फरवरी 1972 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित एक रैली में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की गई थी। इस पार्टी ने झारखंड राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन ऐतिहासिक घटनाओं और स्थलों के माध्यम से हजारीबाग जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझा जा सकता है।

5 फरवरी

1833 ई.: ब्रिटिश शासन के तहत हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया। इससे पहले, रामगढ़, खड़गडीहा, और दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को मुख्यालय के रूप में स्थापित किया गया था।

1855-56 ई.: संथालों का विद्रोह हुआ, जिसमें हजारीबाग क्षेत्र में संथालों ने लूटपाट की। खड़गडीहा, गोला, चास, कुजू, बगोदर, और झरपो में सबसे अधिक विद्रोह हुआ।

1920 ई.: हजारीबाग में स्वाधीनता आंदोलन की गति बढ़ी। हजारीबाग के छात्रों ने पटना में बिहारी छात्र संघ की गतिविधि प्रारंभ की।

6 फरवरी

2001: झारखंड राज्य के गठन के बाद, 6 फरवरी को राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पदभार संभाला।

2021: हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के नईटांड़ गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।

7 फरवरी

1833 ई.: ब्रिटिश शासन के तहत हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया। इससे पहले, रामगढ़, खड़गडीहा, और दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को मुख्यालय के रूप में स्थापित किया गया था।

1855-56 ई.: संथालों का विद्रोह हुआ, जिसमें हजारीबाग क्षेत्र में संथालों ने लूटपाट की। खड़गडीहा, गोला, चास, कुजू, बगोदर, और झरपो में सबसे अधिक विद्रोह हुआ।

1920 ई.: हजारीबाग में स्वाधीनता आंदोलन की गति बढ़ी। हजारीबाग के छात्रों ने पटना में बिहारी छात्र संघ की गतिविधि प्रारंभ की।

8 फरवरी

2001: झारखंड राज्य के गठन के बाद, 6 फरवरी को राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पदभार संभाला।

2021: हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के नईटांड़ गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।

9 फरवरी

1833 ई.: ब्रिटिश शासन के तहत हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया। इससे पहले, रामगढ़, खड़गडीहा, और दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को मुख्यालय के रूप में स्थापित किया गया था।

1855-56 ई.: संथालों का विद्रोह हुआ, जिसमें हजारीबाग क्षेत्र में संथालों ने लूटपाट की। खड़गडीहा, गोला, चास, कुजू, बगोदर, और झरपो में सबसे अधिक विद्रोह हुआ।

1920 ई.: हजारीबाग में स्वाधीनता आंदोलन की गति बढ़ी। हजारीबाग के छात्रों ने पटना में बिहारी छात्र संघ की गतिविधि प्रारंभ की।

10 फरवरी

2001: झारखंड राज्य के गठन के बाद, 6 फरवरी को राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पदभार संभाला।

2021: हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के नईटांड़ गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।

11 फरवरी

1833 ई.: ब्रिटिश शासन के तहत हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया। इससे पहले, रामगढ़, खड़गडीहा, और दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को मुख्यालय के रूप में स्थापित किया गया था।

1855-56 ई.: संथालों का विद्रोह हुआ, जिसमें हजारीबाग क्षेत्र में संथालों ने लूटपाट की। खड़गडीहा, गोला, चास, कुजू, बगोदर, और झरपो में सबसे अधिक विद्रोह हुआ।

1920 ई.: हजारीबाग में स्वाधीनता आंदोलन की गति बढ़ी। हजारीबाग के छात्रों ने पटना में बिहारी छात्र संघ की गतिविधि प्रारंभ की।

12 फरवरी

2001: झारखंड राज्य के गठन के बाद, 6 फरवरी को राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पदभार संभाला।

2021: हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के नईटांड़ गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच विवाद हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।

13 फरवरी

1833 ई.: ब्रिटिश शासन के तहत हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया। इससे पहले, रामगढ़, खड़गडीहा, और दक्षिण-पश्चिम सीमांत एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को मुख्यालय के रूप में स्थापित किया गया था।

1855-56 ई.: संथालों का विद्रोह हुआ, जिसमें हजारीबाग क्षेत्र में संथालों ने लूटपाट की। खड़गडीहा, गोला, चास, कुजू, बगोदर, और झरपो में सबसे अधिक विद्रोह हुआ।

1920 ई.: हजारीबाग में स्वाधीनता आंदोलन की गति बढ़ी। हजारीबाग के छात्रों ने पटना में बिहारी छात्र संघ की गतिविधि प्रारंभ की।

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